संसद का बजट सत्र चल रहा है। हाल के दिनों में हमने देखा कि किस तरीके से संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग मुद्दे उठे हैं। आज भी संसद के दोनों सदनों में कई मुद्दों पर चर्चा हुई है। इसी कड़ी में आज हम आपको जलवायु परिवर्तन और न्यायिक सुधारों के बारे में बताने जा रहे हैं कि दोनों ही मुद्दे को आज संसद में उठाया गया है। तो चलिए हम आपको इन दोनों ही मुद्दों पर आसान भाषा में पूरी जानकारी देते हैं।
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कैसे उठा मुद्दा
देश में किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रतिबद्धता जताते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि आम की ऐसी किस्म विकसित की जा रही हैं, जिन पर जलवायु परिवर्तन का कोई असर नहीं पड़ेगा। चौहान ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि देश में किसानों के सामने अनेक चुनौतियों के साथ ही जलवायु परिवर्तन का संकट भी है और इस बार के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 1,37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट इन्हीं संकटों से निपटने के लिए पारित किया गया है। राज्यसभा में मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) सदस्य राघव चड्ढा ने देश में न्यायिक सुधारों की मांग करते हुए न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाए जाने की जरूरत पर बल दिया। आप सदस्य ने उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया और कहा कि अदालत को न्याय का मंदिर माना जाता है और लोगों को भरोसा रहता है कि वहां अन्याय नहीं होगा।
जलवायु परिवर्तन
जलवायु परिवर्तन का मतलब तापमान और मौसम के पैटर्न में दीर्घकालिक बदलाव से है। ऐसे बदलाव प्राकृतिक हो सकते हैं, जो सूर्य की गतिविधि में बदलाव या बड़े ज्वालामुखी विस्फोटों के कारण हो सकते हैं। लेकिन 1800 के दशक से, मानवीय गतिविधियाँ जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण रही हैं। मुख्य रूप से कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधन के जलने के कारण पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ है। पृथ्वी की सतह का औसत तापमान अब 1800 के दशक के अंत (औद्योगिक क्रांति से पहले) की तुलना में लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक है और पिछले 100,000 वर्षों में किसी भी समय की तुलना में अधिक गर्म है।
जलवायु परिवर्तन से पृथ्वी पर लगातार तापमान बढ़ रहा है। गर्मी ज्यादा हो रही है। आम जीवन अस्त वयस्त हो रहा है। मौसम में निरंतर बदलाव देखने को मिलता है। इसका बड़ा कारण पेड़ो की कटाई भी है। फिलहाल जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए दावे तो कई होते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मेलनों का दौर हमने देखा है। हालांकि इसका नतीजा किस तरीके से निकलता है, इस पर सभी की निगाहें रहने वाली है।
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न्यायिक सुधार
किसी भी लोकतांत्रिक के देश में न्यायिक प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की संभावनाएं लगातार बनी होती है। ऐसे में आज के हिसाब से कानून बनाने की जरूरत होगी जिसे हम न्यायिक सुधार की श्रेणी में रख सकते हैं। समय-समय पर हमने देखा है कि देश में चुनाव सुधार, पुलिस सुधार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार हुए हैं। ऐसे में न्यायिक सुधार की भी संभावना बनी रहती है।
न्यायिक सुधार का लक्ष्य यह सुनिश्चित होता है कि न्याय प्रणाली कानून के शासन को कायम रखे तथा सभी नागरिकों को निष्पक्ष एवं समय पर न्याय प्रदान करें। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्याय की गति बढ़ाना भी इसका अहम हिस्सा होता है। यह मामला हाल के दिनों में क्यों उठ रहा है, इसका बड़ा कारण एक जज के यहां से पैसे मिलना है। यही कारण है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाने की जरूरत पर बल दिया जा रहा है। देखना होगा कि सरकार इस दिशा में क्या कुछ करती है।