दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में कथित संलिप्तता को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ आगे की जांच करने का आदेश दिया। यह मामला यमुना विहार निवासी मोहम्मद इलियास द्वारा अगस्त 2024 में दायर एक याचिका से संबंधित है, जिसमें दयालपुर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) मिश्रा और तीन भाजपा नेताओं मुस्तफाबाद विधायक मोहन सिंह बिष्ट और पूर्व विधायक जगदीश प्रधान और सतपाल सांसद सहित पांच अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने क्या कहा
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पहली घटना के संबंध में आगे की जांच शुरू की जाए क्योंकि शिकायतकर्ता ने संज्ञेय अपराध का खुलासा किया है। कपिल मिश्रा के खिलाफ हम आगे की जांच का निर्देश दे रहे हैं क्योंकि हमारा प्रथम दृष्टया मानना है कि यह संज्ञेय अपराध है। कपिल मिश्रा को इलाके में देखा गया था। इलियास का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता महमूद प्राचा ने आरोप लगाया कि 23 फरवरी, 2020 को उन्होंने मिश्रा और उनके सहयोगियों को कर्दमपुरी में एक सड़क को अवरुद्ध करते और रेहड़ी-पटरी वालों की गाड़ियों को नष्ट करते देखा।
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आप का तंज
फरवरी में, दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि जांच में मिश्रा को गलत तरीके से फंसाने की साजिश का पता चला है। कोर्ट के आदेश पर आप नेता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि कपिल मिश्रा ने दिल्ली में किस तरह दंगे भड़काए, यह तो सभी ने देखा। भाजपा द्वारा उन्हें बचाने की अनगिनत कोशिशों के बाद भी कोर्ट ने पाया कि कपिल मिश्रा दंगों के दौरान मौजूद थे और उन पर आगे की जांच की जानी चाहिए। क्या वह कैबिनेट मंत्री बनने के लायक हैं? पुलिस को उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार करना चाहिए क्योंकि दिल्ली दंगों के सभी अन्य आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
North East Delhi riots case | The Rouse Avenue Court directed further investigation against Delhi Law Minister Kapil Mishra in relation to his alleged role in the North East Delhi riots. The court allowed the application for registration of FIR against Mishra.
The court said…
— ANI (@ANI) April 1, 2025